2 thoughts on “कमल रावत

  1. अपने पहाड़ों की सौंधी सुगंध बिखरी है खुदेड़ डाँडी काठी में
    सार्थक प्रयास हेतु हार्दिक शुभकामनाएं

    1. धन्यवाद, कविता रावत जी, अहोभाग्य हमारे जो हमने, उत्तराखंड देवभूमि मे जन्म लिया, यदि हमारे माध्यम से इस मिट्टी की खुशबू को हम,दूर दूर तक पहुंचा सके तो,जीवन यथार्थ हो जायेगा ।

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